डीआरआई ने दावा किया कि बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों ने आयातित कोयले की कीमत को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाकर उसके आधार पर बिजली टैरिफ पर ज़्यादा मुआवज़ा हासिल किया. अनुमानों के मुताबिक यह 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला था.
वी. के सिंह, ए.डी.एम. महाराजगंज